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किसानो के साथ अन्याय बर्दाश्त नही-विधायक पानाचंद मेघवाल राज्य सरकार ने मामले पर पुर्नविचार का दिया आश्वासन’

किसानो के साथ अन्याय बर्दाश्त नही-विधायक पानाचंद मेघवाल
राज्य सरकार ने मामले पर पुर्नविचार का दिया आश्वासन’
बारां, 14 मार्च।
 बारां-अटरू विधायक पानाचंद मेघवाल ने परवन सिंचाई परियोजना में किसानों की आवाप्त भूमि के मुआवजे का मामला पुरजोर तरीके से सदन में उठाते हुए कहा कि नगर पालिका अटरू के गठन होने के बाद किसानों को नगरपालिका अटरू को आधार बनाकर भूमि का मुआवजा दिया जा रहा है डीएलसी रेट कम होने से मुआवजा काफी कम बन रहा है जबकि अटरूरुनगर पालिका के गठन के पूर्व किसानों को बारा नगर परिषद को आधार मानकर मुआवजा दिया जा रहा था किसानांे को अपनी एक जमीन का मुआवजा अलग-अलग दरों से दिया जा रहा है जिससे किसानांे को काफी नुकसान हो रहा है।
विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने इस मामले में जल संसाधन मंत्री से नियमों में परिवर्तन कर किसानांे को राहत देने को कहा। जल संसाधन मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले पर पुनर्विचार करेगी और किसानांे को राहत देने का पूरा प्रयास किया जाएगा। प्रश्नकाल में विधायक मेघवाल ने तारांकित प्रश्न के माध्यम से परवन वृहद सिंचाई परियोजना में किसानांे की अवाप्त भूमि का मुआवजा देने का मामला उठाया। जिस पर जल संसाधन मंत्री महेन्द्रजीत सिंह मालवीय ने सदन मे जवाब दिया कि परवन वृहद सिंचाई परियोजना हेतु  23630 किसानों की 7060.22 हैक्टेयर भूमि अवाप्त की गई है तथा 260.69 हैक्टेयर भूमि अवाप्त की जानी शेष है। परवन वृहद सिंचाई परियोजना हेतु 21716  किसानों को राशि रूपये 1951.95 करोड का मुआवजा भुगतान किया गया है तथा 1914 किसानों को मुआवजा दिया जाना शेष है। मुआवजे का निर्धारण भूमि अर्जन पुर्नवासन एवं पुनर्व्यस्थापन में उचित प्रतिकार और पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अन्तर्गत धारा 11 की अधिसूचना जारी होने की तिथि को प्रभावी डीएलसी दर से मूल्यांकन कर राज्य सरकार के आदेश दिनांक 14.06.2016 के अनुसार निकटतम शहरी क्षेत्र की सीमा से अवाप्ति हेतु  प्रस्तावित भूमि की दूरी के आधार पर देय प्रतिकर पैकेज के निर्धारण हेतु डीएलसी दर को निर्धारित गुणक से गुणा कर मुआवजा का निर्धारण कर उसमें 100 प्रतिशत सोलेशियम जोडा जाता है एवं डीएलसी दर पर धारा 11 की अधिसूचना प्रकाशन की तिथि से अवार्ड जारी होने की तिथि तक 12 प्रतिशत दर से ब्याज भी मुआवजा राशि में सम्मिलित किया जाता है। पूरक प्रश्न पर बोलते हुए विधायक मेघवाल ने कहा कि भूमि अवाप्ति के समय नगर परिषद बारां और नगर पालिका छबडा ही अस्तित्व में थी। वर्ष 2020 में अटरू मे नगरपालिका की घोषणा हुई अधिकारियों की लापरवाही की वजह से किसानांे की अवाप्त भूमि की धारा 11 की कार्रवाई समय पर नही हो पाई  फलस्वरूप उन किसानांे को उस समय पर पुरानी दर से मुआवजा नही दिया जा सका। विधायक मेघवाल ने कहा कि एक किसान की जमीन का एक हिस्सा 2 साल पहले अवाप्त किया गया तो उसे पूरा मुआवजा दिया गया और दूसरा हिस्सा आज अवाप्त किया जा रहा है उसका मुआवजा आज लगभग आधा दिया जा रहा है ये किसानों के साथ अन्याय है। विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने मंत्री महेन्द्रजीत मालवीया से कहा कि नगरपालिका अटरू के गठन के बाद किसानांे को मुआवजे का निर्धारण कम दर से हो रहा है। आप नियमांे में परिवर्तन कर किसानो को पुरानी दर से मुआवजा देने का प्रयास करें। इस पर मंत्री महेन्दजीत मालवीया ने सदन मंें कहा कि राज्य सरकार इस प्रकरण का दुबारा परीक्षण करवा कर पूरा प्रयास करेगी की किसानों को पुरानी दर से मुआवजा मिल सके।

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