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कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसलों से देश को अलग पहचान मिली: प्रकाश जावड़ेकर

केंद्रीय सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के कोरोना काल में दिए गए बीस लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज को ऐतिहासिक करार देते हुए इसकी आलोचना कर रहे विपक्ष को आड़े हाथ लिया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोविड-19 के खतरे को बहुत पहले भांप लेने के साथ-साथ सतर्क, निर्णायक कदम उठाने से देश में इस वायरस के प्रसार को धीमा करने में मदद मिली और भारत को कई अन्य देशों से अलग भी खड़ा किया। अब तो प्रधानमंत्री द्वारा की गई देश को महत्वपूर्ण क्षति से बचाने की त्वरित कार्यवाही को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है।

जावड़ेकर ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि जब किसी देश पर कोई संकट आता है तो वह उसके शीर्ष नेतृत्व को एक से अधिक तरीकों से परखता है। सबसे पहले तो जब कोई संकट आता है तो उसके प्रति तत्काल प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होती है। कोविड-19 महामारी नेतृत्व की परीक्षा ले रही है। इस परीक्षा में भारत और उसके प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

जावड़ेकर ने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत न केवल वायरस के खिलाफ एक उत्साही लड़ाई कर रहा है, बल्कि संकट के बाद की कोविड दुनिया को भी देख रहा है और इसके लिए खुद को सावधानीपूर्वक तैयार कर रहा है ताकि वह अपना सर्वश्रेष्ठ कदम आगे रख सके। आत्मनिर्भर भारत के स्पष्ट आह्वान और उसके बाद पांच दिनों की अवधि में कई ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं, जिन्हें भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ के रूप में याद रखा जाएगा।

उन्होंने कहा कि आसन्न संकट से नहीं घबराने के प्रेरक संदेश के साथ ही वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के पुनर्गठन में एक बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार रहने के संदेश ने हर भारतीय को उत्साह से भर दिया है। जावड़ेकर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विरोध करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इन लोगों की यादाश्त थोड़ी कम है। सरकार द्वारा घोषित सबसे पहला राहत पैकेज गरीबों के लिए प्रधान मंत्री गरीब कल्याण पैकेज का 1.7 लाख करोड़ रुपए का था।

उन्होंने कहा कि यूपीए युग के विपरीत यह सिर्फ एक घोषणा नहीं रहा। अब तक 39 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को लगभग 35,000 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता मिल भी चुकी है। इसमें 8 करोड़ से अधिक किसान शामिल हैं जिन्होंने अपने खातों में 2,000 रुपए प्राप्त किए और 20 करोड़ से अधिक जन धन खाताधारी महिलाओं ने सहायता की पहली और दूसरी किस्त प्राप्त की है। यूपीए की तथाकथित ऋण माफी को हर कोई याद करता है जो किसानों तक किसी भी महत्वपूर्ण तरीके से नहीं पहुंची बल्कि उसने अर्थव्यवस्था को चौपट कर दिया। जबकि यहां मोदी सरकार सीधे लोगों तक पहुंच रही है और जांच-परख कर उपाय कर रही है

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